
Here's funny poetry for refreshing good old high school days :)
लड़कपन का एक किस्सा, जो है अब album का हिस्सा...
याद कर मन यूं मुस्काया, ठहाका लगाने से मैं खुद को न रोक पाया |
School के हम चार यार, किताबों के साथ मौज-मस्ती से भी था हमको प्यार |
History lecture bunk कर मैं बोला, Friday first show हो जाये आज |
Goggles, hat पहन किया सबने खूब fashion, बाज़ू चढ़ा दिखाया मैंने भी फिर अपना टशन |
Roadies से समझा खुद को कम नहीं, पिक्चर के Hero में भी था इतना दम नहीं |
Ticket खिड़की पर थी वो खड़ी, दिल speed से उछला जैसे ही अपनी आँख लड़ी |
मैं अब समझा खुद को Dhoni, तो वो भी दिखी Sunny Leone
शुरू हुई फिर नज़रों की आँख मिचौली |
अपनी तारीफों के किस्से गिनाना जो मैंने शुरू किया,
गाना गा Kishore Kumar, तो कभी Mohammad Rafi हुआ|
पड़ेगा इस से खूब impression, यही सोच style में था खड़ा|
उसने भी फिर कदम बढ़ा, बुलाने का जैसे इशारा किया,
गदगद हो ख़ुशी से फिर मैंने भी दिया कदम बढ़ा |
पलक झपकते ही मजनू का था क़त्ल हुआ,
सोचा था, उसने मुझे है बुलाया, पीछे था मामू खड़ा |
Collar पकड़ उसने मुझको खूब नचाया,
करवा Hip-hop और भारत-नाट्यम,
India’s Most Unwanted Talent था मुझे बनाया |
वो Sunny Leone अब Shashikala थी हो चली,
और मैं भी Dhoni से Amol Palekar सा था लौट चला |
शूपणखा दिखी सामने, जब होश आया, टकटकी हटी
बीवी थी वो सामने, टूटी चप्पल लिए जो थी खडी |
Album छीन उसने side में फेंकी
मुन्ना और दूध की bottle फिर मैंने अपने हाथ में देखी |
काम करो कुछ, वो चिल्लाई, कल शाम से गायब है अपनी बाई |
अब वो गुज़रे यादें और किस्से, मन में ही सोचा करते हैं
और ग्रहस्ती में खुद को हर दिन, हम यूहीं झौंका करते हैं |