
चला कुछ दिनो वो सब भी,
अंत मैं बस खत्म होने को॥
वो समझे, कुछ मांज़रा होगा,
मिलकर भी बात नहीं करते।
अ ब कौन समजाये उन सबको,
ये रिश्ते कलम-कागज के॥
Pic Courtesy: Pixabay

चला कुछ दिनो वो सब भी,
अंत मैं बस खत्म होने को॥
वो समझे, कुछ मांज़रा होगा,
मिलकर भी बात नहीं करते।
अ ब कौन समजाये उन सबको,
ये रिश्ते कलम-कागज के॥
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