मोक्ष.

By @elve5/12/2019poetry

मोक्ष।

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अल्पज्ञ जीवात्मा की शक्ति, अतिशय सीमित होती है। वह सुख दुःख के भँवरों में, प्रायः व्याकुल हो जाया करती है। इन भँवरो के भव-बंधन से, वह मुक्ति खोजता रहता है। जन्म मृत्यु के बंधन की मुक्ति से, वह साधन अपनाया करता है।

Friends stay tuned for the remaining part which is in process.

A beautiful poem on Moksha composed by @indra

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